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बिग बॉस 19: प्रतियोगी का रखा जाता है मानसिक रूप से ख्याल

बिग बॉस 19: प्रतियोगी का रखा जाता है मानसिक रूप से ख्याल

Big boss 19 के क्रिएटर्स ने बताया है कि कंटेस्टेंट्स के फिजिकल और मानसिक हेल्थ का पूरा ध्यान रखा जा रहा है, उनके लिए चिकित्सा की सुविधा 24 बाय7 है। ऑडिशन के मेडिकल चेकअप होने के बाद ही कंटेस्टेंट्स को घर में एंट्री दी जाती है । इस शो का उद्देश्य सिर्फ फाइट दिखा ही नहीं,बल्कि इमोशन को भी दिखाना है।

credit : x.com/ big boss winner contestants

हर साल हम बिग बॉस में देखते हैं कि कंटेस्टेंट्स का हौसला बहुत बार टूट जाता है शो के दौरान वह रोते हैं या छोड़ने की धमकी देते हैं वह बहुत बार हताश भी हो जाते हैं कई बार सो के दौरान ही घबराहट भी महसूस होने लगती है बहुत बार लोगों की मानसिक हालत भी खराब होने लगती है लेकिन मार्क्स ने इसका उपाय निकली है जो की बहुत सरल है बिग बॉस के क्रिकेटर्स ने न्यूज़ चैनल को बताया है कि उन्होंने कंटेस्टेंट का ध्यान रखने का पूरा शेड्यूल बना लिया है।

 

दिलचस्प बात यह है कि यह सब प्रक्रिया आरंभ होने वाले दिनों से शुरू हो गई है, ओडिसन से पहले उन्हें सब इंटर्नशिप से शुरू कर दिया गया है। किसी भी सेलिब्रिटी को इन सभी मानसिक चिकित्सा से जुड़े लेखों में शामिल करें ताकि उनका मानसिक व्यवहार पता चल सके।

 

स्टूडियो के प्रोड्यूसर ने बताया है कि, “डॉक्टरों का बताया है कि ये सब व्यक्ति उन्हें लगते हैं , मानसिक रूप से फिट नहीं हैं,  और इन सब से हमें बचाव करना चाहिए और ऐसे लोगों को भी शामिल नहीं करना चाहिए बिग बॉस 19 सीजन में।

 

डॉक्टर ने आगे बताया है कि,”जब एक बार कंटेस्टेंट घर में पहुंच जाते हैं तो उनकी पूरी जिम्मेदारी कैमरे से लेकर एक्शन तक की पूरी जिम्मेदारी उनकी हो जाती है चाहे दिन हो या रात”।

Credit: x.com/inside photo big boss 19 season

मानसिक रूप का 24 घंटे ध्यान रखा जाता है

उन्होंने आगे बताया, “अगर किसी को मेडिकल की जरूरत है तो वह उन्हें 24/7 उपलब्ध रखता है और उन्हें कोई भी चिकित्सा की कमी नहीं होने देता है। मानसिक जांच के लिए डॉक्टर हमेशा उपलब्ध रहते हैं। अगर किसी को मानसिक रूप से कोई परेशानी होती है तो वह तुरंत जांच कराते हैं और अपने डॉक्टर से सलाह लेते हैं कि उन्हें भी क्या हुआ है।”

 

ऋषि नेगी ने यह भी बताया ,”अगर किसी कंटेस्टेंट की मानसिक हालत ठीक नहीं रहती, तो यह फैसला कि उसे शो से निकालना है या रहने देना है, यह फैसला, प्रोड्यूसर के द्वारा नहीं ,बल्कि डॉक्टरों के द्वारा लिया जाता है।”

यह भावनात्मक शो है,न कि फाइट शो

क्रिएटर ने यह भी कहा है, “शो को देखने वाले लोग अलग-अलग तरह के और अलग-अलग उम्र के होते हैं इसलिए सलाह दी जाती है,” उन्होंने कहा कि हमारे ऑडियंस अलग-अलग तरह के और बहुत अलग-अलग स्टेटस से भी हैं, इसलिए ध्यान रखें कि शो में क्या और क्या नहीं इस समय अलग-अलग तरह की भावनाएं होती हैं जैसे गुस्सा, खुशी, आंसू बहाना, आदि। सिर्फ लड़ाई ही नहीं, दिखाई नहीं देती तो बॉक्सिंग मैच हो चुका होता “।

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